साधारण बीमा सर्वेक्षकों ने इरडा की दमनकारी नीतियों से त्रस्त, अर्धनग्न होकर जंतर मंतर पर किया प्रदर्शन

 

नई दिल्ली। साधारण बीमा श्रमिकों की मांगों को लेकर देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में आज जंतर-मंतर पर अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में देश भर से आए सैकड़ों प्रबुद्ध तकनीकी बीमा सर्वेयरों ने इरडा के दमनकारी साजिशों और गैरकानूनी नीतियों के खिलाफ वित्त मंत्रालय एवं सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है।

देश के सभी राज्यों से आए सभी सर्वेक्षकों को संबोधित करते हुए समाजसेवी व् भाजपा के वरिष्ठ नेता जावेद खान ने सभी सर्वेक्षकों को सम्बोधित किया। ईसला के पूर्व अध्यक्ष श्री अशोक कुमार, ललित गुप्ता, शिव प्रकाश, जोनल अध्यक्ष निर्मल त्रिपाठी, पूर्व उपाध्यक्ष, महेंद्र शर्मा, पूर्व उपाध्यक्ष, राकेश सोनी, पूर्व निदेशक, प्रेमचंद शुक्ला, जवाहर लाल टि क्कू, वर्तमान सचिव तन्मय सरकार तथा विभिन्न ज़ोन एवं चैप्टर के पदाधिकारी संतोष रंजना, एस.एस. ब्राइट, एस. चौहान, रवि धर, दिनेश गुप्ता, राधे श्याम रावल, उमेश अग्रवाल एवं देश के विभिन्न प्रदेशों से आए सर्वेक्षकों में आर. भसीन, राधे श्याम गर्ग आदि ने इरडा की प्रस्तावित रेगुलेशन 2019 के नीतियों के खिलाफ एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि यह आंदोलन स्वतंत्र बीमा सर्वेक्षकों के कानूनी प्रावधान 64 यूएम को कुचलने का प्रयास है। यह प्रयास सिर्फ श्रमिकों का नहीं बल्कि आम बीमा धारकों के हितों का ज्यादा नुकसान करेगी। अनैतिक तौर पर बिना फार्म 19 की तहकीकात के इनहाउस लिमिट को बढ़ाने के फैसले एवं अप्रशिक्षित एंप्लाइज से सर्वेक्षण करवाने से उपभोक्ता के साथ-साथ देश को 500 करोड़ रूपए से ज्यादा का जीएसटी का नुकसान हो रहा है। यही नहीं प्राइवेट साधारण बीमा कंपनी के द्वारा बिना बिल के क्लेम निष्पादन करने से भी हजारों करोड़ों का जीएसटी का भी अलग से नुकसान हो रहा है। साथ ही साथ तकनीकी सक्षम लोगों के बीमा सर्वेक्षकों के प्रोफेसन में आने के रास्ते भी बंद हो गए। यह सर्वविदित है कि जबसे इरडा बनी है तब से स्वतंत्र सर्वेक्षकों की संख्या में तेजी से कमी हुई है तथा ज्यादातर प्राइवेट बीमा कंपनी के अनैतिक कारोबार में तेजी से इजाफा हुआ है। यह विचित्र विडंबना है कि इरडा की गलत नीतियों के कारण सरकारी बैंकों की तरह सरकारी साधारण बीमा कंपनियों का घाटा बढ़ता जा रहा है। साथ ही सरकार का राजकोषीय घाटा भी इरडा की इस दमनकारी नीतियों को वापस लेने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हेतु सरकार से यह मांग रखी गई। प्रस्तावित रेगुलेशन के ड्राफ्ट को वापस लिया जाए और एक निष्पक्ष स्वतंत्र सिलेक्ट कमिटी एवं वित्त मंत्रालय के नेतृत्व में रेगुलेशन की रूपरेखा तैयार की जाए।

स्वतंत्र बीमा सर्वेक्षकों ने सरकार और मंत्रालय से उपभोक्ता हितों की रक्षा करने, देश की आर्थिक उन्नति के लिए, बेरोजगारी के इस दौर में ज्यादा से ज्यादा तकनीकी लोगों के लिए, स्वतंत्र बीमा सर्वेक्षण में रोजगार के अवसर मुहैया कराने तथा इसला के चिर प्रतिक्षित चार्टर स्टेटस को बहाल करने की मांग रखी गई।

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अपराध संवाददाता नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मोस्ट वांटेड आतंकवादी अब्दुल माजिद बाबा को श्रीनगर से गिरफ्तार किया है। इस आतंकी की गिरफ्तारी पर पुलिस ने दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किया गया आतंकी कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद वर्ष 2015 में अपने दो साथियों के साथ फरार हो गया था, तभी से पुलिस को इसकी तलाश थी। खुफिया सूचना के आधार पर माजिद बाबा को शनिवार शाम श्रीनगर से गिरफ्तार किया गया। करीब डेढ़ माह पहले ही इसके एक साथी आतंकी फय्याज अहमद लोन को भी स्पेशल सेल ने पकड़ा था। पुलिस इससे पूछताछ कर फरार तीसरे साथी बशीर उर्फ पोनू की की जानकारी निकालने में लगी है। स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव ने बताया कि पुलिस के हत्थे चढ़ा अब्दुल माजिद 2007 में साथियों के साथ विस्फोटक लेकर दिल्ली आया था। कब केंद्रीय खुफिया इकाइयों से सूचना मिली थी कि जैश-ए- मोहम्मद के पाकिस्तानी कमांडर फारुख कुरैशी ने जम्मू-कश्मीर के एरिया कमांडर हैदर उर्फ डॉक्टर को दिल्ली में बडी आतंकी वारदात को अंजाम देने का निर्देश दिया। इसके लिए बांग्लादेश सीमा के रास्ते भारत में प्रवेश करने वाले पाकिस्तानी आतंकी शाहिद ग फूर, अब्दुल माजिद बाबा, फय्याज अहमद लोन और जैश कमांडर बशीर अहमद पोनू उर्फ मौलवी मालवा एक्सप्रेस ट्रेन पर सवार होकर दिल्ली पहुंचे थे। डीसीपी के अनुसार जैसे ही चारों बैग में हथियार एवं विस्फोटक लेकर दिल्ली के दीनदायाल उपाध्याय मार्ग होते हुए रंजीत सिंह फ्लाईओवर के समीप पहुंचे तो पुलिस ने इन्हें घेर लिया। तब इन्होंने पुलिस पर फायरिंग की। जवाबी फायरिंग के बाद इन्हें पकड़ा गया। इनके पास से .3 बोर की पिस्लौल, तीन किग्रा विस्फोटक, 50 हजार नकद ओर 10 हजार यूएस डॉलर बरामद हुए। जम्मू-कश्मीर के सोपोर जिले के माग्रेपुरा गांव का रहने वाला आतंकी अब्दुल माजिद बाबा 2007 में अपने दो कश्मीरी साथियों फय्याज अहमद लोन एवं जैश कमांडर बशीर अहमद पोनू उर्फ मौलवी और पाकिस्तानी आतंकी शाहिद गफ्फूर के साथ पकड़ा गया था। इसमें से पाकिस्तानी को तो निचली कोर्ट से ही सजा मिल गई थी लेकिन माजिद, फय्याज और बशीर को बरी कर दिया गया था। इस पर स्पेशल सेल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो तीनों को उम्रकैद की सजा मिली। सजा मिलते ही तीनों फरार हो गए थे। स्पेशल सेल के मुताबिक इन तीनों के फरार होने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने इनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। तभी से स्पेशल सेल की टीम लगातार इनकी तलाश में जुटी थी। इस दौरान ही पिछले महीने सेल ने फय्याज अहमद लोन को गिरफ्तार किया था। अब गुप्त सूचना के आधार पर स्पेशल सेल ने श्रीनगर से इस शातिर आतंकी अब्दुल माजिद बाबा को दबोच लिया। स्पेशल सेल आरोपित को लेकर दिल्ली आ रही है। उससे पूछताछ कर अब उसके आतंकी नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा। जम्मू कश्मीर में सीआरपीएफ पर हुए हमले के बाद आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई में जुटी एजेंसियों ने स्थानीय व केंद्रीय खुफिया इकाइयों की मदद से संदिग्धों की सूची तैयार करनी शुरू की। इस दौरान इस फरार आतंकी के बारे में जानकारी मिली तो सुरक्षा एजेंसियों से इसकी डिटेल साझा किया गया। इसके बाद पुलिस टीम लगातार इसकी गतिविधि पर नजर रखने लगी। इस बीच इसकी गतिविधि की जैसे ही जानकारी मिली, स्पेशल सेल की टीम ने उसे धर दबोचा। पुलिस के हत्थे चढ़ा आतंकी जैश का नेटवर्क खड़ा करने में जुटा था। इसमें खासतौर से कश्मीरी नौजवान उसके निशाने पर थे। वहीं उसके साथ फरार हुए दोनों साथी भी जैश के नेटवर्क का विस्तार करने मे जुटे थे। यह खुलासा मामले की जांच में जुटी स्पेशल सेल की टीम ने किया। हालांकि फरार इन आतंकियों ने जैसे ही पिछले तीन महीने से जैश की जमीन तैयार करने का गुपचुप खेल शुरू किया, पुलिस की नजर में आ गए। इसके बाद पुलिस ने करीब डेढ़ महीने पहले फय्याज को दबोचा। इसके बाद माजिद को भी धर दबोचा।