बहुजन नेत्री वी लक्ष्मीकुट्टी जिसके नेतृत्व में 'स्तन क्लॉथ' आंदोलन 1952 से 1956 तक जारी रहा

ननगेली ने अपने अधिकारों के समर्थन में जो नींव रखी उसी को ज्योतिबाफुले-सावित्रीबाई फुले और बाबासाहेब आंबेडकर ने विस्तार दिया, जिसके चलते दलित आज यहाँ तक पहुंच सके हैं।


ननगेली तुम्हारा आभार..कि मैं आज अपने ब्रेस्ट ढांक सकती हूँ।


दलित इतिहास में नींव का पत्थर हो तुम और तुम्हारा विरोध।


ब्राह्मणों ने अपने जातीय विशेषाधिकार और लम्पटता के चलते अमानवीय और घृणित नियम-क़ानून बनाए हुए थे, जिनमें से एक अमानवीय व्यवस्था कि दलित महिलाएं अपने स्तन नहीं ढँक सकती थी।


पिछड़ा वर्ग की महिलाओं पर यह बंदिश थी जिसमें दलित भी शामिल थे। अय्यंकल्ली ने यह आंदोलन चलाया था। पिछडे, दलित और आदिवासी वर्ग की महिलाओं पर खास तौर पर यह निर्देश था कि वह ब्राह्मणों के सामने अपने स्तन खुला रखें। ऐसा नहीं करने पर उनके स्तन काट लिए जाते थे। स्तन ढंकना ऊँची कहे जाने वाली सवर्ण जातियों की महिलाओं का विशेषाधिकार था। यदि कोई पिछड़ी/दलित स्त्री अपना स्तन ढंकना चाहे तो उसे उसे "स्तन कर"(Breast Tax) जिसे 'मुलविकर्म' कहा जाता था, चुकाना होता था. टैक्स कितना देना होगा, ये भी बाकायदा स्त्री  के स्तनों के आकार औऱ प्रकार की जाँच करके निर्धारित किया जाता था।


केरल के त्रावणकोर के चिरथेला में अपने पति के साथ रहने वाली ननगेली ने इस टैक्स का सार्वजनिक रूप से  विरोध किया और कर निरीक्षकों को टैक्स देने से मना कर दिया। 1803 ई. में जब टैक्स देने के लिए अधिकारियों द्वारा ननगेली को प्रताड़ित किया गया तो उसने अपने सम्मान और अस्मिता के लिए इस अमानवीय टैक्स का विरोध करते हुए दराँती से अपने दोनों ब्रेस्ट ख़ुद काटकर कलेक्टर के सामने प्रस्तुत किए। अपने आत्मसम्मान और जातीय प्रिविलेज के विरोध करते हुए, ननगेली शहीद हो गईं। ननगेली के पति ने अपनी पत्नी के सम्मान, प्रेम और आत्मग्लानि में उसकी जलती चिता में कूदकर आत्महत्या कर ली। 1803 में हुई इस घटना के बाद ननगेली की बहादुरी से प्रेरणा लेकर 1813 में स्तन ढँकने के अधिकार पाने को लेकर अय्यंकल्ली और कुछ बहुजनों के प्रयासों से व्यापक विरोध आंदोलन हुए जिसके परिणामस्वरूप दलित महिलाओं को स्तन ढँकने के अधिकार मिलने के साथ ही ब्रेस्ट टैक्स से भी मुक्ति मिली। 1947 में आज़ादी मिलने के बाद भी त्रिशुर, तलापल्ली, अल्लपुझा आदि जिलों में यह अमानवीय प्रथा प्रचलित रही है।


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अपराध संवाददाता नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मोस्ट वांटेड आतंकवादी अब्दुल माजिद बाबा को श्रीनगर से गिरफ्तार किया है। इस आतंकी की गिरफ्तारी पर पुलिस ने दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किया गया आतंकी कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद वर्ष 2015 में अपने दो साथियों के साथ फरार हो गया था, तभी से पुलिस को इसकी तलाश थी। खुफिया सूचना के आधार पर माजिद बाबा को शनिवार शाम श्रीनगर से गिरफ्तार किया गया। करीब डेढ़ माह पहले ही इसके एक साथी आतंकी फय्याज अहमद लोन को भी स्पेशल सेल ने पकड़ा था। पुलिस इससे पूछताछ कर फरार तीसरे साथी बशीर उर्फ पोनू की की जानकारी निकालने में लगी है। स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव ने बताया कि पुलिस के हत्थे चढ़ा अब्दुल माजिद 2007 में साथियों के साथ विस्फोटक लेकर दिल्ली आया था। कब केंद्रीय खुफिया इकाइयों से सूचना मिली थी कि जैश-ए- मोहम्मद के पाकिस्तानी कमांडर फारुख कुरैशी ने जम्मू-कश्मीर के एरिया कमांडर हैदर उर्फ डॉक्टर को दिल्ली में बडी आतंकी वारदात को अंजाम देने का निर्देश दिया। इसके लिए बांग्लादेश सीमा के रास्ते भारत में प्रवेश करने वाले पाकिस्तानी आतंकी शाहिद ग फूर, अब्दुल माजिद बाबा, फय्याज अहमद लोन और जैश कमांडर बशीर अहमद पोनू उर्फ मौलवी मालवा एक्सप्रेस ट्रेन पर सवार होकर दिल्ली पहुंचे थे। डीसीपी के अनुसार जैसे ही चारों बैग में हथियार एवं विस्फोटक लेकर दिल्ली के दीनदायाल उपाध्याय मार्ग होते हुए रंजीत सिंह फ्लाईओवर के समीप पहुंचे तो पुलिस ने इन्हें घेर लिया। तब इन्होंने पुलिस पर फायरिंग की। जवाबी फायरिंग के बाद इन्हें पकड़ा गया। इनके पास से .3 बोर की पिस्लौल, तीन किग्रा विस्फोटक, 50 हजार नकद ओर 10 हजार यूएस डॉलर बरामद हुए। जम्मू-कश्मीर के सोपोर जिले के माग्रेपुरा गांव का रहने वाला आतंकी अब्दुल माजिद बाबा 2007 में अपने दो कश्मीरी साथियों फय्याज अहमद लोन एवं जैश कमांडर बशीर अहमद पोनू उर्फ मौलवी और पाकिस्तानी आतंकी शाहिद गफ्फूर के साथ पकड़ा गया था। इसमें से पाकिस्तानी को तो निचली कोर्ट से ही सजा मिल गई थी लेकिन माजिद, फय्याज और बशीर को बरी कर दिया गया था। इस पर स्पेशल सेल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो तीनों को उम्रकैद की सजा मिली। सजा मिलते ही तीनों फरार हो गए थे। स्पेशल सेल के मुताबिक इन तीनों के फरार होने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने इनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। तभी से स्पेशल सेल की टीम लगातार इनकी तलाश में जुटी थी। इस दौरान ही पिछले महीने सेल ने फय्याज अहमद लोन को गिरफ्तार किया था। अब गुप्त सूचना के आधार पर स्पेशल सेल ने श्रीनगर से इस शातिर आतंकी अब्दुल माजिद बाबा को दबोच लिया। स्पेशल सेल आरोपित को लेकर दिल्ली आ रही है। उससे पूछताछ कर अब उसके आतंकी नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा। जम्मू कश्मीर में सीआरपीएफ पर हुए हमले के बाद आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई में जुटी एजेंसियों ने स्थानीय व केंद्रीय खुफिया इकाइयों की मदद से संदिग्धों की सूची तैयार करनी शुरू की। इस दौरान इस फरार आतंकी के बारे में जानकारी मिली तो सुरक्षा एजेंसियों से इसकी डिटेल साझा किया गया। इसके बाद पुलिस टीम लगातार इसकी गतिविधि पर नजर रखने लगी। इस बीच इसकी गतिविधि की जैसे ही जानकारी मिली, स्पेशल सेल की टीम ने उसे धर दबोचा। पुलिस के हत्थे चढ़ा आतंकी जैश का नेटवर्क खड़ा करने में जुटा था। इसमें खासतौर से कश्मीरी नौजवान उसके निशाने पर थे। वहीं उसके साथ फरार हुए दोनों साथी भी जैश के नेटवर्क का विस्तार करने मे जुटे थे। यह खुलासा मामले की जांच में जुटी स्पेशल सेल की टीम ने किया। हालांकि फरार इन आतंकियों ने जैसे ही पिछले तीन महीने से जैश की जमीन तैयार करने का गुपचुप खेल शुरू किया, पुलिस की नजर में आ गए। इसके बाद पुलिस ने करीब डेढ़ महीने पहले फय्याज को दबोचा। इसके बाद माजिद को भी धर दबोचा।