कोरोना वायरस या फिर चीन का जैविक हथियार

मो. अनस सिद्दीकी
नई दिल्ली। विश्व में जैविक हथियारों को लेकर एक होड़ सी मची हुई थी। आखिर लैविक हथियारों का संग्रहण किस लिए किया जा रहा था। चीन के वुहान से शुरू हुए कोरोना वायरस जैविक हथियार का परीक्षण तो नहीं था। जिसने विश्व समुदाय को न केवल हिला कर रख दिया है बल्कि आर्थिक व्यवस्थ तहस-नहस कर दी है।




चीन ने सबसे पहले कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाई और तब तक अपने फ्रिजों में रखी जब तक पूरे विश्व की आर्थिक अर्थव्यवस्था को पाताल में नहीँ उतार दिया। चीन पूरी दुनिया के इन्वेस्टर्स का हब बन गया था।
चीन ने अपने वुहान शहर में इस वायरस को छोडा और जबरदस्त मौतों के कारण भागते इन्वेस्टर्स के शेयरों को कौडी के भाव खरीद लिया और विदेशी निवेशक और उद्यमी अपनी पूंजी छोड़ कर भाग गये। चीन ने अपने द्वारा पहले से बनाई और छुपा कर रखी गई वैक्सीन को बाहर निकाल लिया और एक ही दिन में चीन में हो रही मौतों को रोक दिया। इस युद्ध में चीन ने अपने कुछ लोग खोये पर पूरी दुनिया की दौलत लूट ली। आज वहाँ एक भी मौत नहीँ हुइ और न ही एक भी मरीज की संख्या बढी। आज ये वायरस पूरी दुनिया में काल की तरह चक्कर लगा रहा है।
कमाल ये भी देखिये उन सभी देशों और शहरों की कमर टूट गई है जहाँ पर चीनी नागरिक खर्च करते थे। आज पूरा विश्व हर रोज अपनी अर्थव्यवस्था को ध्वस्त होते देख रहा है, पर 17 मार्च सै चीन की अर्थव्यवस्था दिनों दिन मजबूत हो रही है। ये एक आर्थिक युद्ध है जिसमें चीन जीत चुका है और विश्व कुदरत से युद्ध करते करते रोज अपने जान माल को गंवा रहा है। 
ये भारत के लोगों का इम्यून है कि वह हर संकट में कुशल यौद्धा की तरह लडता है और जीतता है। हमारे देश के अधिकांश नागरिक इकनोमी के आकंडो में नहीँ फसते, पत्थर में से पानी निकालने की कुव्वत रखते हैं। हम भारतीय बडे से बडे रोग को रोटी के टुकड़े में लपेट कर खाने और पचाने में माहिर हैं। हम कभी कुदरत के विरुद्ध युद्ध नहीँ करते बल्कि उसकी पूजा करते हैं। हम भारतीय मन्दिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों और गिरजाघरों से आवाज दे दे कर बुलाते हैं। ईश्वर को रिझाते हैं अतः वो ईश्वर हमारा अनिष्ट कर ही नहीँ सकता। पर हर भारतीय को याद रखना चाहिए कि चीन और चीनी इस कुदरत के खलनायक है इनसे हर प्रकार की दूरी बनाए रखें।
भले आज भारत में लॉक डाउन है, पर चीन के सभी शहर खुले हुए है और तो और 8 अप्रैल से चीन वुहान को भी खोलने की घोषणा कर चूका है। चीन में एक भी नेता को, एक भी मिलिट्री लीडर को, 1 भी बड़े आदमी को कोरोना नहीं हुआ है।
कोरोना वायरस ने दुनिया भर में इकॉनमी को बर्बाद कर दिया है। हजारों की जान जा चुकी है। लाखों को ये बीमारी हो चुकी है और अनगिनत लोग घरों में बंद कर दिए गए है। कई देशों में लॉक डाउन हो चूका है जिसमे भारत भी एक है।
कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर से निकला है, और अब ये दुनिया के कोने-कोने में पहुँच चुका है। पर ये वायरस वुहान के ही पास चीन की राजधानी बीजिंग और आर्थिक राजधानी शंघाई तक नहीं पहुंचा। आज पेरिस बंद है, न्यूयॉर्क बंद है। बर्लिन बंद है। रोम बंद है। दिल्ली बंद है। मुंबई बंद है। टोक्यो बंद है। दुनिया के प्रमुख आर्थिक और राजनतिक केंद्र बंद है पर बीजिंग और शंघाई खुले हुए है। वहां कोरोना ने कोई असर ही नहीं दिखाया। गिने-चुने केस सामने आये। पर एक तरह से बीजिंग और शंघाई पर कोरोना का कोई असर ही नहीं हुआ।
बीजिंग वो शहर है जहाँ चीन के सभी नेता रहते है। यहाँ मिलिट्री लीडर रहते है। चीन की सत्ता को चलाने वाले यहाँ रहते है। बीजिंग में कोई लॉक डाउन नहीं है। ये खुला हुआ है। यहाँ कोरोना का कोई असर नहीं। 
शंघाई वो शहर है जो चीन की इकॉनमी को चलाता है। ये चीन की आर्थिक राजधानी है। यहाँ चीन के सभी अमीर लोग रहते है। इंडस्ट्री को चलाने वाले रहते है। यहाँ भी कोई लॉक डाउन नहीं। यहाँ कोरोना का कोई असर नहीं।
क्या कोरोना एक पाला हुआ वायरस है। जिसे बता दिया गया है कि तुम्हे दुनिया भर में आतंक मचाना है पर तुम बीजिंग और शंघाई नहीं आओगे। चीन से ये सवाल पूछा जाना बहुत जरुरी है कि जब दुनिया के बड़े-बड़े विकसित देश कोरोना को नहीं रोक सके। दुनिया के बड़े-बड़े शहरों में कोरोना ने आतंक मचा दिया तो ये वायरस बीजिंग क्यों नहीं पहुंचा। शंघाई क्यों नहीं पहुंचा। बीजिंग और शंघाई वुहान से लगे हुए इलाके ही है। वुहान से निकला वायरस दुनिया के कोने कोने में पहुँच गया पर ये वायरस शंघाई नहीं पहुंचा।
आज पूरा भारत और 130 करोड़ भारतीय भले लॉक डाउन हो चुके है। हमारी इकॉनमी ठप्प हो रही है। पर चीन के सभी प्रमुख शहर खुले हुए है और तो और अब 8 अप्रैल से चीन वुहान को भी खोल रहा है। पूरी दुनिया आतंक से त्रस्त हो चुकी है पर चीन में अब नए केस भी सामने नहीं आ रहे है और चीन खुला हुआ है।
एक और बड़ी चीज यह कि दुनिया भर के शेयर मार्किट लगभग आधी गिर चुकी है। भारत में भी निफ्टी 12 हजार से 7 हजार तक पहुँच गया है। पर चीन का शेयर मार्किट 3 हजार पे था जो 2700 पर ही है। चीन के मार्किट पर भी इस वायरस का कोई असर नहीं दिख रहा है।
ये जो भी चीजें है वो सिर्फ एक बात की ओर इशारा करती है कि कोरोना चीन का जैविक हथियार है। जिसे चीन ने दुनिया भर में तबाही के लिए बनाकर छोड़ दिया है। अपने यहाँ कुछ लोगो को मरवा कर चीन ने अब इस वायरस पर कण्ट्रोल कर लिया है। कदाचित उसके पास दवाई भी है जो वो दुनिया से शेयर नहीं कर रहा है। दुनिया में बड़े-बड़े लोगो को कोरोना हो चुका है। हॉलीवुड स्टार, ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री, ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री, स्पेन के प्रधानमत्री की पत्नी और अब तो ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स को भी कोरोना के शिकार हो चुके है। पर चीन में एक भी नेता, एक भी मिलिट्री कमांडर को कोरोना ने टच भी नहीं किया है।


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अपराध संवाददाता नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मोस्ट वांटेड आतंकवादी अब्दुल माजिद बाबा को श्रीनगर से गिरफ्तार किया है। इस आतंकी की गिरफ्तारी पर पुलिस ने दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किया गया आतंकी कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद वर्ष 2015 में अपने दो साथियों के साथ फरार हो गया था, तभी से पुलिस को इसकी तलाश थी। खुफिया सूचना के आधार पर माजिद बाबा को शनिवार शाम श्रीनगर से गिरफ्तार किया गया। करीब डेढ़ माह पहले ही इसके एक साथी आतंकी फय्याज अहमद लोन को भी स्पेशल सेल ने पकड़ा था। पुलिस इससे पूछताछ कर फरार तीसरे साथी बशीर उर्फ पोनू की की जानकारी निकालने में लगी है। स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव ने बताया कि पुलिस के हत्थे चढ़ा अब्दुल माजिद 2007 में साथियों के साथ विस्फोटक लेकर दिल्ली आया था। कब केंद्रीय खुफिया इकाइयों से सूचना मिली थी कि जैश-ए- मोहम्मद के पाकिस्तानी कमांडर फारुख कुरैशी ने जम्मू-कश्मीर के एरिया कमांडर हैदर उर्फ डॉक्टर को दिल्ली में बडी आतंकी वारदात को अंजाम देने का निर्देश दिया। इसके लिए बांग्लादेश सीमा के रास्ते भारत में प्रवेश करने वाले पाकिस्तानी आतंकी शाहिद ग फूर, अब्दुल माजिद बाबा, फय्याज अहमद लोन और जैश कमांडर बशीर अहमद पोनू उर्फ मौलवी मालवा एक्सप्रेस ट्रेन पर सवार होकर दिल्ली पहुंचे थे। डीसीपी के अनुसार जैसे ही चारों बैग में हथियार एवं विस्फोटक लेकर दिल्ली के दीनदायाल उपाध्याय मार्ग होते हुए रंजीत सिंह फ्लाईओवर के समीप पहुंचे तो पुलिस ने इन्हें घेर लिया। तब इन्होंने पुलिस पर फायरिंग की। जवाबी फायरिंग के बाद इन्हें पकड़ा गया। इनके पास से .3 बोर की पिस्लौल, तीन किग्रा विस्फोटक, 50 हजार नकद ओर 10 हजार यूएस डॉलर बरामद हुए। जम्मू-कश्मीर के सोपोर जिले के माग्रेपुरा गांव का रहने वाला आतंकी अब्दुल माजिद बाबा 2007 में अपने दो कश्मीरी साथियों फय्याज अहमद लोन एवं जैश कमांडर बशीर अहमद पोनू उर्फ मौलवी और पाकिस्तानी आतंकी शाहिद गफ्फूर के साथ पकड़ा गया था। इसमें से पाकिस्तानी को तो निचली कोर्ट से ही सजा मिल गई थी लेकिन माजिद, फय्याज और बशीर को बरी कर दिया गया था। इस पर स्पेशल सेल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो तीनों को उम्रकैद की सजा मिली। सजा मिलते ही तीनों फरार हो गए थे। स्पेशल सेल के मुताबिक इन तीनों के फरार होने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने इनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। तभी से स्पेशल सेल की टीम लगातार इनकी तलाश में जुटी थी। इस दौरान ही पिछले महीने सेल ने फय्याज अहमद लोन को गिरफ्तार किया था। अब गुप्त सूचना के आधार पर स्पेशल सेल ने श्रीनगर से इस शातिर आतंकी अब्दुल माजिद बाबा को दबोच लिया। स्पेशल सेल आरोपित को लेकर दिल्ली आ रही है। उससे पूछताछ कर अब उसके आतंकी नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा। जम्मू कश्मीर में सीआरपीएफ पर हुए हमले के बाद आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई में जुटी एजेंसियों ने स्थानीय व केंद्रीय खुफिया इकाइयों की मदद से संदिग्धों की सूची तैयार करनी शुरू की। इस दौरान इस फरार आतंकी के बारे में जानकारी मिली तो सुरक्षा एजेंसियों से इसकी डिटेल साझा किया गया। इसके बाद पुलिस टीम लगातार इसकी गतिविधि पर नजर रखने लगी। इस बीच इसकी गतिविधि की जैसे ही जानकारी मिली, स्पेशल सेल की टीम ने उसे धर दबोचा। पुलिस के हत्थे चढ़ा आतंकी जैश का नेटवर्क खड़ा करने में जुटा था। इसमें खासतौर से कश्मीरी नौजवान उसके निशाने पर थे। वहीं उसके साथ फरार हुए दोनों साथी भी जैश के नेटवर्क का विस्तार करने मे जुटे थे। यह खुलासा मामले की जांच में जुटी स्पेशल सेल की टीम ने किया। हालांकि फरार इन आतंकियों ने जैसे ही पिछले तीन महीने से जैश की जमीन तैयार करने का गुपचुप खेल शुरू किया, पुलिस की नजर में आ गए। इसके बाद पुलिस ने करीब डेढ़ महीने पहले फय्याज को दबोचा। इसके बाद माजिद को भी धर दबोचा।