विक्लांग और दिल्ली एनसीआर की बेटियों के फरिश्ता साबित हो रहा है मो. अलीम


मो. अनस सिद्दीकी
नई दिल्ली। यदि किसी में इंसानियत जाग जाए तो वह अपने कार्य अनुसार कभी भी, कहीं भी, किसी की मदद के लिए तत्पर हो जाता है। मदद करने वाले लोग न तो सरकार का, और न ही किसी अन्य प्रकार के फण्ड का ही इंजार करते हैं। वह तो बस जुनूनी बनकर अपनी मंजिल की ओर चल पड़ते हैं। ऐसे ही एक जुनूनी का नाम है मो. अलीम।
मो. अलीम कहने को तो कुछ खास पढ़े लिखा युवक नहीं है। केवल दसवी पास कर उत्तर प्रदेश के बंदायु जिले से दिल्ली में आया युवक है। इसने टूव्हीलर रिपेयरिंग का काम सीखा। उसके बाद काफी दिन तक कई नामचीन कंपनियों में काम किया। लेकिन उसका मन कंपनी में काम करने में नहीं लगा। अलबत्ता कंपनी की नौकरी को अलविदा कह दिया। मन में अलग तरीके से कुछ करने तथा अपने स्तर पर बिना किसी से सहयोग लिए जज्बे की ज्वाला का पाल कर निकल पड़ा अपने मिशन पर। मो. अलीम ने अपने टूव्हीलर रिपेयरिंग के काम में कुछ अलग तरह से काम करने की ललक लिए काम शुरू कर दिया। मो. अलीम ने उत्तरी पूवी दिल्ली के थाना जाफराबद के अन्तर्गत मौजपुर के निकट एम.एस. स्टार नाम से वर्कशाप खोली और फिर सभी प्रकार के टूव्हीलर रिपेयरिंग का काम शुरू कर दिया। समाज के उन वंचित लोगों के लिए निशुल्क काम करना शुरू कर दिया जिनके लिए कई बार परिवार के लोग भी मदद करने से कतराने लगते हैं।


 




मो. अलीम ने खुद भी अपने अधीन काम करने वाले सभी मैकेनिकों को हिदायत दी कि कोई भी विक्लांग युवक, युवती उसकी वर्कशाप पर काम कराने के लिए आते हैं तो उनसे सर्विस चाज न लिया जाए बल्कि स्पेयर पाटर््स की कीमत में भी उनको छूट देना शुरू कर दिया। मो. अलीम पर अपने ही काम में समाज सेवा करने का तरीका भी ढूढं निकाला। उसने अपना मोबाइल नम्बर 9891861780 आम करना शुरू कर दिया और कहा कि यदि किसी भी विक्लांग व्यक्ति अथवा दिल्ली एनसीआर की किसी भी बेटी का टूव्हीलर रास्ते में खराब हो जाता है और वह मो. अलीम को कॉल करते है तो उनके पास जाकर संभव हुआ तो मौके पर ही उनके टूव्हीलर को ठीक करता है अन्यता पीड़ित को उसके गतव्य स्थान पर सुरक्षित पहुंचाकर उसके बाद उसके वाहन को टॉयिंग कर वर्कशाप  पर लाकर ठीक कर अगले दिन पीड़ित के घर पहुंचाने का काम करता है। मो. अलीम इस के लिए विक्लांग व्यक्ति अथवा एनसीआर दिल्ली की बेटियों से किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लेता। केवल स्पेयर पार्ट्स के ही 75 फीसदी पैसे लेते है।
मो. अलीम की इच्छा है कि अभी वह सीमित संसाधन में हीं सीमित संख्या में विक्लांगों और महिलाओं की सेवा कर पा रहे हैं। अगर उनको कुछ कंपनियां या फिर व्यक्तिगत रूप से आर्थिक सहयोग मिल जाए तो वह इस कार्य को दिल्ली के सभी 12 जिलों के साथ-साथ गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद, बल्लभगढ़, सोनीपत इत्यादि स्थानों पर अपने सेंटर खोलकर उसके माध्यम से ज्यादा से ज्याददा लोगों की सेवा करना चाहते हैं। यूं तो बाजार में बहुत से कंपनियां है जो आपातकालीन सेवा देती हैं लेकिन वह उसके बदले में मोटी रकम वसूलती है। मो. अलीम चाहते हैं कि दिल्ली एनसीआर की बेटियों को वाहन खराब होने पर सड़क पर बहुत इंतजार न करना पड़े बल्कि जल्द से जल्द उनके वाहन को ठीक करके सुरक्षित उनके घर पहुंचा सके। कावंड़ के समय जो लोग टूव्हीलर से कावंड लेने जाते है ओर उनके वाहन रास्ते में खराब हो जाते हैं तो उनकी भी निःशुल्क सेवा करते हैं उनके वाहनों को मौके पर ठीक करने का भी काम करता है यह युवक। मो. अलीम का कहना है कि साधारण व्यक्ति दुपहिया वाहन खराब होने पर बहुत दूर तक धक्के मारकर नहीं ले जा सकता है। विक्लांग व्यक्ति के लिए और भी दुश्वारी है कि वह चाहकर भी धक्के नहीं लगा सकता है। इसलिए विक्लांग और बेटियों के लिए मोबाइल वर्कशाप के माध्यम से सेवा करने की चाहत है।


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अपराध संवाददाता नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मोस्ट वांटेड आतंकवादी अब्दुल माजिद बाबा को श्रीनगर से गिरफ्तार किया है। इस आतंकी की गिरफ्तारी पर पुलिस ने दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किया गया आतंकी कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद वर्ष 2015 में अपने दो साथियों के साथ फरार हो गया था, तभी से पुलिस को इसकी तलाश थी। खुफिया सूचना के आधार पर माजिद बाबा को शनिवार शाम श्रीनगर से गिरफ्तार किया गया। करीब डेढ़ माह पहले ही इसके एक साथी आतंकी फय्याज अहमद लोन को भी स्पेशल सेल ने पकड़ा था। पुलिस इससे पूछताछ कर फरार तीसरे साथी बशीर उर्फ पोनू की की जानकारी निकालने में लगी है। स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव ने बताया कि पुलिस के हत्थे चढ़ा अब्दुल माजिद 2007 में साथियों के साथ विस्फोटक लेकर दिल्ली आया था। कब केंद्रीय खुफिया इकाइयों से सूचना मिली थी कि जैश-ए- मोहम्मद के पाकिस्तानी कमांडर फारुख कुरैशी ने जम्मू-कश्मीर के एरिया कमांडर हैदर उर्फ डॉक्टर को दिल्ली में बडी आतंकी वारदात को अंजाम देने का निर्देश दिया। इसके लिए बांग्लादेश सीमा के रास्ते भारत में प्रवेश करने वाले पाकिस्तानी आतंकी शाहिद ग फूर, अब्दुल माजिद बाबा, फय्याज अहमद लोन और जैश कमांडर बशीर अहमद पोनू उर्फ मौलवी मालवा एक्सप्रेस ट्रेन पर सवार होकर दिल्ली पहुंचे थे। डीसीपी के अनुसार जैसे ही चारों बैग में हथियार एवं विस्फोटक लेकर दिल्ली के दीनदायाल उपाध्याय मार्ग होते हुए रंजीत सिंह फ्लाईओवर के समीप पहुंचे तो पुलिस ने इन्हें घेर लिया। तब इन्होंने पुलिस पर फायरिंग की। जवाबी फायरिंग के बाद इन्हें पकड़ा गया। इनके पास से .3 बोर की पिस्लौल, तीन किग्रा विस्फोटक, 50 हजार नकद ओर 10 हजार यूएस डॉलर बरामद हुए। जम्मू-कश्मीर के सोपोर जिले के माग्रेपुरा गांव का रहने वाला आतंकी अब्दुल माजिद बाबा 2007 में अपने दो कश्मीरी साथियों फय्याज अहमद लोन एवं जैश कमांडर बशीर अहमद पोनू उर्फ मौलवी और पाकिस्तानी आतंकी शाहिद गफ्फूर के साथ पकड़ा गया था। इसमें से पाकिस्तानी को तो निचली कोर्ट से ही सजा मिल गई थी लेकिन माजिद, फय्याज और बशीर को बरी कर दिया गया था। इस पर स्पेशल सेल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो तीनों को उम्रकैद की सजा मिली। सजा मिलते ही तीनों फरार हो गए थे। स्पेशल सेल के मुताबिक इन तीनों के फरार होने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने इनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। तभी से स्पेशल सेल की टीम लगातार इनकी तलाश में जुटी थी। इस दौरान ही पिछले महीने सेल ने फय्याज अहमद लोन को गिरफ्तार किया था। अब गुप्त सूचना के आधार पर स्पेशल सेल ने श्रीनगर से इस शातिर आतंकी अब्दुल माजिद बाबा को दबोच लिया। स्पेशल सेल आरोपित को लेकर दिल्ली आ रही है। उससे पूछताछ कर अब उसके आतंकी नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा। जम्मू कश्मीर में सीआरपीएफ पर हुए हमले के बाद आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई में जुटी एजेंसियों ने स्थानीय व केंद्रीय खुफिया इकाइयों की मदद से संदिग्धों की सूची तैयार करनी शुरू की। इस दौरान इस फरार आतंकी के बारे में जानकारी मिली तो सुरक्षा एजेंसियों से इसकी डिटेल साझा किया गया। इसके बाद पुलिस टीम लगातार इसकी गतिविधि पर नजर रखने लगी। इस बीच इसकी गतिविधि की जैसे ही जानकारी मिली, स्पेशल सेल की टीम ने उसे धर दबोचा। पुलिस के हत्थे चढ़ा आतंकी जैश का नेटवर्क खड़ा करने में जुटा था। इसमें खासतौर से कश्मीरी नौजवान उसके निशाने पर थे। वहीं उसके साथ फरार हुए दोनों साथी भी जैश के नेटवर्क का विस्तार करने मे जुटे थे। यह खुलासा मामले की जांच में जुटी स्पेशल सेल की टीम ने किया। हालांकि फरार इन आतंकियों ने जैसे ही पिछले तीन महीने से जैश की जमीन तैयार करने का गुपचुप खेल शुरू किया, पुलिस की नजर में आ गए। इसके बाद पुलिस ने करीब डेढ़ महीने पहले फय्याज को दबोचा। इसके बाद माजिद को भी धर दबोचा।