डॉक्टर पायल तडवी प्रकरण की जांच करेगी आईएमए

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने गठित की एक 'फैक्ट फाइंडिंग कमेटी'



मो. अनस सिद्दीकी
नई दिल्लीः चिकित्सा जैसे पेशे के भीतर सामाजिक आयामों और बदलाव का पता लगाने के लिए एक सामंजस्यपूर्ण प्रयास के रूप में मॉर्डन मेडिसन की वैज्ञानिक प्रणाली से जुड़े चिकित्सकों के एक राष्ट्रीय स्वैच्छिक संगठन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने आज बीवाईएल नायर अस्पताल मुंबई में एक युवा महिला रेजिडेंट डॉक्टर पायल तडवी की दुर्भाग्यपूर्ण आत्महत्या की पृष्ठभूमि और इससे जुड़े महत्वपूर्ण कारकों का मूल्यांकन करने के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है।
यह किसी से छिपा नहीं है कि रेजिडेंट डॉक्टरों पर, काम का बोझ बहुत ज्यादा या अमानवीय-सा रहता है, खासतौर पर सरकारी अस्पतालों में यह समस्या ज्यादा है, जिससे डॉक्टर कुंठा और अवसाद के भी शिकार हो जाते हैं। संदर्भित मामले में जातिवादी पूर्वाग्रह और कलंक जैसे आरोप सामने आए हैं। अगर यह सच है तो गंभीर चिंता का विषय है जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। एक बिरादरी के रूप में चिकित्सा का पेशा जाति, धर्म और राजनीति से कोसों दूर है। चिकित्सा बिरादरी के भीतर या रोगियों के साथ किसी भी आधार पर कोई भेदभाव नहीं है। हालांकि, व्यक्तिगत पूर्वाग्रह और दुर्व्यवहार इस अलिखित आचार संहिता में हो सकते हैं। आईएमए, किसी दुर्व्यवहार की आशंका से इंकार नहंी करती।
रेजिडेंट डॉक्टरों की खराब कामकाजी स्थिति, विशेष रूप से सरकारी अस्पतालों में नियमित दिनचर्या के रूप में काम का असाधारण बोझ, कभी-कभार की नैदानिक कौशल की चूक के लिए उड़ाए जाने वाले उपहास की भी अनदेखी नहीं की जा सकती।
फैक्ट फाइंडिंग टीम व्यापक रूप से जटिल इस मुद्दे का अध्ययन करेगी और उम्मीद की जा रही है कि वह एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट आईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंप देगी।
आईएमए फैक्ट फाइंडिंग टीम के डॉ. अशोक अदाहो, आईएमए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, नागपुर, डॉ. रवि वानखेडेकर, आईएमए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, धुले, डॉ. चंद्रकांत म्हास्के, डीन, जीएमसी नांदेड़, डॉ. होजी कपाडिय़ा, आईएमए महाराष्ट्र राज्य अध्यक्ष, मुंबई, तथा डॉ. सुहास पिंगले, आईएमए महाराष्ट्र राज्य सचिव सदस्य नियुक्त किए गए है।


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