प्रेमिका संग मिलकर की पत्नी की हत्या करने वाला इंजीनियर गिरफ्तार

अपराध संवाददाता
नई दिल्ली। अपने बचपन के प्यार को पाने के लिए एक मैकेनिकल इंजीनियर ने प्रेमिका के साथ मिलकर मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाली पत्नी की हत्या कर दी। साजिश के तहत आरोपित ने अपनी प्रेमिका के जरिए पत्नी को जहरीला पदार्थ पिलाया और फिर इसे खुदकुशी की शक्ल देने की कोशिश की। लेकिन साक्ष्य और सबूत के आगे उनकी साजिश विफल हो गई और किशनगढ़ थाना पुलिस ने आरोपित को उसकी प्रेमिका के साथ गिरफ्तार कर लिया। प्रेमिका भी नोएडा से एमबीए करने के बाद एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करती है। आरोपित ग्वालियर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद एक निजी कंपनी में मैकेनिकल इंजीनियर के पद पर कार्यरत था। डीसीपी देवेंद्र आर्या ने बताया कि पकड़े गए आरोपितों की पहचान किशनगढ़ निवासी राहुल कुमार मिश्रा (32) और मयूर विहार निवासी पदमा (33) के रूप में हुई है। गत 16 मार्च को किशनगढ़ थाना पुलिस को फोर्टिज अस्पताल से एक महिला की संदिग्ध हालत में मौत की सूचना मिली। मृतका की पहचान पूजा राय (26) के रूप में हुई। जांच में पता चला कि किशनगढ़ निवासी पूजा को उसके पति राहुल ने अस्पताल में भर्ती कराया था। चूंकि शादी के सात साल पूरे नहीं हुए थे इसलिए मामले की जानकारी एसडीएम को दी गई। पुलिस ने पूजा के शव का डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया। उधर एसडीएम ने पूजा के परिवार वालों का बयान दर्ज कर लिया। गत 27 अप्रैल को पुलिस को पूजा का पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिला। जिसमें हत्या की आशंका जताई गई थी। पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी जांच में पति और उसकी प्रेमिका पर हुआ शक तकनीकी सर्विलांस में जो तथ्य सामने आए उससे पूजा के पति और उसकी प्रेमिका पदमा पर शक गहरा गया। मोबाइल सर्विलांस से पता चला कि हत्या की वारदात के पहले पदमा पूजा के पास आई थी। उसके बाद पुलिस ने पूजा के पति और पदमा से पूछताछ की जिसमें दोनों के बयान विरोधाभाषी थे। उससे पुलिस का शक और ज्यादा गहरा गया और पुलिस ने दोनों ने सख्ती से पूछताछ की। जिसमें उन लोगों ने अपना अपराध कबूल कर लिया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। बचपन का प्यार पाने के लिए दिया वारदात को अंजाम पूछताछ में राहुल ने बताया कि वह और पदमा तिवारी झारखंड के धनबाद में एक ही स्कूल में बचपन से पढ़ते थे। दोनों अच्छे दोस्त थे। 12वीं तक वहां पढ़ाई करने के बाद दोनों उच्च शिक्षा बाहर चले गए और उनके बीच कोई संपर्क नहीं हुआ। अप्रैल 2015 में पदमा को स्कूल के एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया जिसमें पदमा ने राहुल को भी देखा। पदमा ने राहुल से बात की और फिर दोनों के बीच प्यार पनप गया। लेकिन परिवार वाले उनके रिश्ते से खुश नहीं थे और परिजनों ने दोनों की शादी से इंकार कर दिया। जनवरी 2017 में परिवार वालों ने राहुल की शादी पूजा राय से तय कर दी। राहुल ने पूजा से मिलकर पदमा के रिश्ते के बारे में बताया ताकि पूजा शादी करने से इंकार कर दे, लेकिन पूजा ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। 23 अप्रैल 2017 को पूजा और राहुल की शादी हो गई। इसके बाद राहुल और पदमा पूजा से नफरत करने लगे। साजिश के तहत राहुल ने अपनी पत्नी को पदमा के पास बायोडाटा भेजने के लिए कहा ताकि उनके बीच बातचीत होने लगे। लेकिन इस मिलने जुलने के दौरान पूजा पदमा को राहुल के साथ संबंध रखने को लेकर ताना मारने लगी। उसके बाद राहुल और पदमा ने पूजा की हत्या की साजिश रच डाली। घटना वाले दिन नौकरी की बात को लेकर पदमा पूजा के घर पहुंची और अपने साथ जहरीला पदार्थ मिला पेय पदार्थ भी ले गई थी। पदमा ने पूजा को पेय पदार्थ पिला दिया। साथ ही खुद से लिखा गया पूजा का फर्जी सुसाइड नोट उसके पास रखकर फरार हो गई।


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अपराध संवाददाता नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मोस्ट वांटेड आतंकवादी अब्दुल माजिद बाबा को श्रीनगर से गिरफ्तार किया है। इस आतंकी की गिरफ्तारी पर पुलिस ने दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किया गया आतंकी कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद वर्ष 2015 में अपने दो साथियों के साथ फरार हो गया था, तभी से पुलिस को इसकी तलाश थी। खुफिया सूचना के आधार पर माजिद बाबा को शनिवार शाम श्रीनगर से गिरफ्तार किया गया। करीब डेढ़ माह पहले ही इसके एक साथी आतंकी फय्याज अहमद लोन को भी स्पेशल सेल ने पकड़ा था। पुलिस इससे पूछताछ कर फरार तीसरे साथी बशीर उर्फ पोनू की की जानकारी निकालने में लगी है। स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव ने बताया कि पुलिस के हत्थे चढ़ा अब्दुल माजिद 2007 में साथियों के साथ विस्फोटक लेकर दिल्ली आया था। कब केंद्रीय खुफिया इकाइयों से सूचना मिली थी कि जैश-ए- मोहम्मद के पाकिस्तानी कमांडर फारुख कुरैशी ने जम्मू-कश्मीर के एरिया कमांडर हैदर उर्फ डॉक्टर को दिल्ली में बडी आतंकी वारदात को अंजाम देने का निर्देश दिया। इसके लिए बांग्लादेश सीमा के रास्ते भारत में प्रवेश करने वाले पाकिस्तानी आतंकी शाहिद ग फूर, अब्दुल माजिद बाबा, फय्याज अहमद लोन और जैश कमांडर बशीर अहमद पोनू उर्फ मौलवी मालवा एक्सप्रेस ट्रेन पर सवार होकर दिल्ली पहुंचे थे। डीसीपी के अनुसार जैसे ही चारों बैग में हथियार एवं विस्फोटक लेकर दिल्ली के दीनदायाल उपाध्याय मार्ग होते हुए रंजीत सिंह फ्लाईओवर के समीप पहुंचे तो पुलिस ने इन्हें घेर लिया। तब इन्होंने पुलिस पर फायरिंग की। जवाबी फायरिंग के बाद इन्हें पकड़ा गया। इनके पास से .3 बोर की पिस्लौल, तीन किग्रा विस्फोटक, 50 हजार नकद ओर 10 हजार यूएस डॉलर बरामद हुए। जम्मू-कश्मीर के सोपोर जिले के माग्रेपुरा गांव का रहने वाला आतंकी अब्दुल माजिद बाबा 2007 में अपने दो कश्मीरी साथियों फय्याज अहमद लोन एवं जैश कमांडर बशीर अहमद पोनू उर्फ मौलवी और पाकिस्तानी आतंकी शाहिद गफ्फूर के साथ पकड़ा गया था। इसमें से पाकिस्तानी को तो निचली कोर्ट से ही सजा मिल गई थी लेकिन माजिद, फय्याज और बशीर को बरी कर दिया गया था। इस पर स्पेशल सेल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो तीनों को उम्रकैद की सजा मिली। सजा मिलते ही तीनों फरार हो गए थे। स्पेशल सेल के मुताबिक इन तीनों के फरार होने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने इनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। तभी से स्पेशल सेल की टीम लगातार इनकी तलाश में जुटी थी। इस दौरान ही पिछले महीने सेल ने फय्याज अहमद लोन को गिरफ्तार किया था। अब गुप्त सूचना के आधार पर स्पेशल सेल ने श्रीनगर से इस शातिर आतंकी अब्दुल माजिद बाबा को दबोच लिया। स्पेशल सेल आरोपित को लेकर दिल्ली आ रही है। उससे पूछताछ कर अब उसके आतंकी नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा। जम्मू कश्मीर में सीआरपीएफ पर हुए हमले के बाद आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई में जुटी एजेंसियों ने स्थानीय व केंद्रीय खुफिया इकाइयों की मदद से संदिग्धों की सूची तैयार करनी शुरू की। इस दौरान इस फरार आतंकी के बारे में जानकारी मिली तो सुरक्षा एजेंसियों से इसकी डिटेल साझा किया गया। इसके बाद पुलिस टीम लगातार इसकी गतिविधि पर नजर रखने लगी। इस बीच इसकी गतिविधि की जैसे ही जानकारी मिली, स्पेशल सेल की टीम ने उसे धर दबोचा। पुलिस के हत्थे चढ़ा आतंकी जैश का नेटवर्क खड़ा करने में जुटा था। इसमें खासतौर से कश्मीरी नौजवान उसके निशाने पर थे। वहीं उसके साथ फरार हुए दोनों साथी भी जैश के नेटवर्क का विस्तार करने मे जुटे थे। यह खुलासा मामले की जांच में जुटी स्पेशल सेल की टीम ने किया। हालांकि फरार इन आतंकियों ने जैसे ही पिछले तीन महीने से जैश की जमीन तैयार करने का गुपचुप खेल शुरू किया, पुलिस की नजर में आ गए। इसके बाद पुलिस ने करीब डेढ़ महीने पहले फय्याज को दबोचा। इसके बाद माजिद को भी धर दबोचा।