बसपा की बनी सरकार, तो सबको मिलेगा स्थायी रोजगार: मायावती


मो. अनस सिद्दीकी
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने शुक्रवार को दिल्ली में उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से प्रत्याशी राजवीर सिंह समेत दिल्ली के सभी पांचों प्रत्याशियों के लिए चुनावी रैली को संबोधित कर जहां बसपा प्रत्याशियों के पक्ष में लोगों से 12 मई को वोटिंग की अपील की, वहीं अपने चिर-परिचित अंदाज में भाजपा, कांग्रेस एवं आम आदमी पार्टी (आप) पर जमकर निशाना भी साधा। मायावती ने रैली में सर्वसमाज के उत्थान के लिए दिल्ली के मतदाताओं को एकजुट हो जाने का आह्वान करते हुए कहा कि भाजपा को सत्ता से बेदखल करने पर ही देश का भला हो सकता है।
मायावती ने एक तरफ जहां विरोधी पार्टियों पर जमकर हमला किया, वहीं उत्तर-पूर्वी दिल्ली सीट के बसपा प्रत्याशी राजवीर सिंह, पूर्वी दिल्ली सीट के प्रत्याशी संजय गहलोत सहित अन्य तीन सीटों पर बसपा प्रत्याशी को भारी मतों से जिताकर संसद भेजने की दिल्ली की जनता से अपील की। बहन मायावती ने कहा कि राजवीर सिंह को पहले हम उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी सीट से प्रत्याशी बनाना चाहते थे, लेकिन बाद में हमने सोचा कि चूंकि ये दिल्ली के व्यवसायी, समाजसेवी के साथ यहीं के वाशिंदे हैं, सो इसलिए यहीं से प्रत्याशी बनाना ठीक रहेगा। इसलिए इन्हें यमुनापार के दंश झेल रहे उत्तर-पूर्व दिल्ली को बेहतरीन दिल्ली में बदलने के लिए यहां से उम्मीदवार बनाया है। उल्लेखनीय है कि इस दौरान मायावती के साथ मंच पर राजवीर सिंह, संजय गहलोत समेत दिल्ली के बाकी तीन बसपा प्रत्याशी भी मौजूद थे।
मायावती ने अपने भाषण में भाजपा एवं कांग्रेस को खास निशाना बनाते हुए कहा कि पिछले चुनाव में भाजपा ने देश में अच्छे दिन लाने के लिए कई सारे लुभावने वादे करके सत्ता तो हासिल कर ली, लेकिन एक भी वादा पूरा नहीं किया और न ही अच्छे दिन आए। इसी तरह इस बार के चुनाव में कांग्रेस भी एक बार फिर अति गरीब को ठगने के लिए छह हजार रुपये प्रतिमाह देने का नया प्रलोभन दे रही है। लेकिन, ये दोनों पार्टियां कभी गरीब एवं पिछड़ों की हितैषी पार्टी नहीं रही। ये पार्टियां सिर्फ प्रलोभन देकर सत्ता में बने रहने का प्रपंच रचती रहती हैं। अच्छे दिन एवं प्रतिमाह छह हजार प्रतिमाह देने से देश में किसी गरीब का भला नहीं होने वाला नहीं है, जब तक उनके पास स्थायी रोजगार नहीं होगा। इसलिए बसपा दिल्ली के इस मंच से वादा करती है कि यदि केंद्र में हमारी सरकार बनी, तो हम हर गरीब को सरकारी या गैरसरकारी क्षेत्र में स्थायी रोजगार देंगे, जिससे सही मायने में गरीबी दूर होगी।
मायावती ने दिल्ली की रैली में दिल्ली के बाहर से आए लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब जैसे राज्यों से आए लोग यहां के मूल निवासी से काफी ज्यादा संख्या में हैं। ये दिल्ली में सरकार बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। ये लोग अपने-अपने राज्यों से रोजगार के लिए यहां आए हुए हैं। इसलिए हम चाहते हैं कि दिल्ली में बाहर से आए लोग एवं दिल्ली के मूल निवासी भी कांग्रेस-भाजपा एवं आप से मोहभंग कर इनके झूठे प्रलोभनों के झांसे में न आएं और यहां बसपा की सरकार बनाने में अपना योगदान दें। इसके साथ ही बसपा सुप्रीमो ने पार्टी संस्थापक स्व. कांशीराम की दिल्ली से उनके जुड़ाव को लोगों को याद दिलाते हुए कहा कि भले ही स्व. कांशीराम ने बसपा की स्थापना महाराष्ट्र के पुणे से की थी, लेकिन दिल्ली उनकी कर्मभूमि रही एवं पार्टी का मुख्यालय भी यहीं बनाया।
बहन मायावती ने कहा कि आप दिल्ली के वासी बसपा से जुड़कर खुद को जगाया था, लेकिन सरकार बनाने तक की मेहनत को अंजाम नहीं दे पाए। कांग्रेस, भाजपा की छलनीति में फंसकर आपलोग गुमराह होते रहे। भ्रष्टाचार में डूबी सरकार को उखाड़ फेंकने का एक मौका भी आया, तो उसका फायदा अन्ना आंदोलन से उपजी पार्टी ने ले लिया। एक बार फिर इन तीनों पार्टियों के भ्रष्टाचार से दिल्ली की जनता त्रस्त है और यही मौका है कि आप फिर एक बार पूरे जोश से जागें और इन तीनों पार्टियों को सत्ता के गलियारे से बाहर का रास्ता दिखाएं।
मायावती ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि रैली में उमड़ी भीड़ देख लग रहा है कि लोग दिल्ली की सत्ता में बदलाव लाने को उत्सुक हैं। लोग भाजपा को भगा कर सर्वसमाज की हितैषी बसपा को सत्ता में लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने लोगों को कई अधिकार दिए, लेकिन उसका लाभ भी नहीं मिलने दिया। अगर आप चाहते हैं कि इन कानूनी अधिकारों का लाभ मिले तो संगठित हो कर बसपा की सरकार बनाने में योगदान दें।
मायावती ने कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की आजादी के बाद केंद्र और देश के अधिक राज्यों में सत्ता रही है। लंबे शासनकाल में गलत नीतियों की वजह से केंद्र और सत्ता से बाहर होना पड़ा। इनके राज में न गरीबी दूर हुई और न किसान खुशहाल हुए। कांग्रेस भी भाजपा के नक्शेकदम पर चलकर गरीबों, किसानों को प्रलोभन के जाल में फंसाने का प्रपंच रच रही है, क्योंकि भाजपा की ही तर्ज पर कांग्रेस भी किसानों एवं गरीबों के खाते में निश्चित रकम देने का स्वांग रच रही है। जिस तरह भाजपा के अच्छे दिन का वादा जुमला साबित हुआ, उसी तरह कांग्रेस का यह वादा भी टांय-टांय फुस्स हो जाएगा। इसलिए ऐसे प्रलोभनों से बचना होगा, वरना फिर पांच साल तक पछताना पड़ेगा।
रैली के दौरान मायावती ने यूपी की लोकसभा सीटों की चर्चा करते हुए कहा कि वहां की अस्सी सीटों में से अधिकांश सीटें बसपा-सपा गठबंधन को मिलने जा रही है। पीएम मोदी एवं अमित शाह ने यूपी में अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन इस बार वहां की जागरूक जनता के आगे इनकी नौटंकी फेल हो गई। यही कारण है कि यूपी में अपनी हार को देखते हुए पीएम मोदी घबराकर अंतिम चरणों के चुनाव में विकास, गरीबी, रोजगार जैसे मसलों को छोड़ निजी आरोप-प्रत्यारोप एवं अनर्गल आलाप पर उतर आए हैं। लेकिन, ये दोनों कुछ भी कर लें, जनता अब इनके झांसे में नहीं आनेवाली है।